बस्तर ब्लॉक के पिपलावंड ग्राम पंचायत के आश्रित ग्राम जामगुड़ा इन दिनों गंभीर जल संकट से जूझ रहा है। लगभग 1000 की आबादी वाला यह गांव पीने के पानी के लिए तरस रहा है। हालात इतने बदतर हैं कि ग्रामीणों को अपनी प्यास बुझाने के लिए 3 से 4 किलोमीटर दूर किसी निजी बोरिंग से पानी लाना पड़ रहा है।
गांव की महिलाएं तपती धूप में सिर पर मटके ढोकर पानी लाने को मजबूर हैं। यह दृश्य न केवल पीड़ा देने वाला है, बल्कि सिस्टम की उदासीनता को भी उजागर करता है। सबसे मार्मिक स्थिति उस विकलांग महिला की है, जिसे ठीक से चलने-फिरने में भी कठिनाई होती है, फिर भी वह लुढ़कते-गिरते किसी तरह पानी लाने को मजबूर है। यह तस्वीर इंसानियत को झकझोर देने वाली है।
ग्रामीणों का कहना है कि तीन साल पहले गांव में एक पानी की टंकी बनाई गई थी, जिसमें कोसा तेरडा तालाब से पानी सप्लाई होता था। लेकिन अब वह व्यवस्था पूरी तरह बंद हो चुकी है। इसके अलावा, सरकार की नल-जल योजना के तहत घर-घर नल तो लगाए गए हैं, लेकिन उनमें एक बूंद पानी नहीं आ रहा। योजना कागजों में सफल दिख रही है, जबकि जमीनी हकीकत कुछ और ही कहानी बयां कर रही है।.ग्रामीणों ने कई बार शिकायत की, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। सवाल यह उठता है कि आखिर जिम्मेदार अधिकारी इस गंभीर समस्या से आंखें क्यों मूंदे बैठे हैं? क्या उन्हें जामगुड़ा के लोगों की पीड़ा नजर नहीं आती?
पानी जैसी बुनियादी जरूरत के लिए ग्रामीणों को इस तरह संघर्ष करना पड़े, यह किसी भी विकासशील समाज के लिए शर्मनाक है।
वही विभाग के अधिकारी ने कहा गाव में 12 हेंड पम्प लगा है ..पानी की कोई समस्या नहीं है लेकिन ये तस्बीर बताने के लिए काफी है की क्या सच है
