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..लाल आतंक के खात्मे के बाद बस्तर की फ़िंजा पूरी तरह से बदल चुकी है.. आदिवासी बाहुल्य बस्तर के बच्चे अब ऐसे खेल में अपने आप को परांगत कर रहे है...जिससे वे अपने बस्तर सहित छत्तीसगढ़ का नाम रौशन कर सके ...जी हां...ये बदलते बस्तर की ही तस्वीर है...जहां गर्मी छुट्टी होते ही..अपने हाथों में एंड्रायड फोन और वीडियो गेम्स में अपना समय बिताने वाले बच्चे.....अब अपने हाथों में कायकिंग और कैनोइंग के खेल को बड़ा रहे है... और अब यह क्षेत्र जल खेलों में भी अपनी नई पहचान बना रहा है...शहर की जीवनरेखा कही जाने वाली इंद्रावती नदी के पुराना पुल के नीचे इन दिनों कयाकिंग जैसे ओलंपिक खेलों में अपने आप को बस्तर के छात्र छात्राएं और दक्ष बना रहे है .. वहीं
सुबह की ताजगी और शाम की ठंडी हवा में नदी किनारे खिलाड़ियों का उत्साह साफ देखा भी जा सकता है .. जिसमें कई प्रतिभागी ग्रामीण और आदिवासी पृष्ठभूमि से हैं.., जो पहले से ही तैराकी में निपुण हैं और अब इस खेल को तेजी से सीखते हुए आगे बढ़ रहे हैं...और उनका आत्मविश्वास भी काफी बढ़ रहा है ...और उन्हें अब राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचने का अवसर भी मिलने वाला है...और ये बच्चे इस खेल से अपने क्षेत्र और प्रदेश का नाम ऊंचा करने में लगे हुए है।
वहीं बस्तर में खेल प्रतिभाओं की कमी नहीं है.. सही मार्गदर्शन और अवसर मिलने पर यहां के खिलाड़ी बड़े मंच तक पहुंच सकते हैं... इंद्रावती नदी में चल रहा यह प्रशिक्षण उसी दिशा में एक मजबूत कदम भी है...इधर यहां के खिलाडी अब तक जम्मूकश्मीर, उत्तराखंड, केरल, हैदराबाद ,पंजाब,भोपाल सहित छत्तीसगढ़ रायपुर तक जाकर नेशनल पदक भी हासिल कर चुके है...और इन्हें और पप्रशिक्षण देकर दक्ष किया जा रहा है।
