बस्तर क्षेत्र में लौह अयस्क परिवहन को लेकर एक नया विवाद सामने आया है, जिसमें वाहन मालिक भोला झा ने परिवहन व्यवस्था और एक निजी कंपनी पर गंभीर आरोप लगाए हैं। इस पूरे मामले ने न केवल परिवहन संघ की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि जांच की पारदर्शिता को लेकर भी चिंताएं बढ़ा दी हैं।
भोला झा के अनुसार, दिनांक 21 अप्रैल को उनकी गाड़ी क्रमांक CG19 BQ 7077 में रेलवे साइडिंग से लौह अयस्क भरा गया था। इसके बाद ड्राइवर की अचानक तबीयत खराब हो जाने के कारण वाहन को उनके वाडा (यार्ड) में खड़ा कर दिया गया। उनका दावा है कि परिस्थितिवश वाहन आगे नहीं बढ़ सका और पूरी जानकारी संबंधित पक्षों को दी गई थी।
मामला तब पेचीदा हो गया जब “वंदना ग्लोबल” कंपनी द्वारा परिवहन संघ को एक पत्र भेजा गया, जिसमें यह उल्लेख किया गया कि सात वाहन गंतव्य तक नहीं पहुंचे। इसी पत्र के आधार पर बस्तर परिवहन संघ ने भोला झा के वाहन को ब्लैकलिस्ट कर दिया।
हालांकि, झा का कहना है कि यह कार्रवाई एकतरफा और बिना सत्यापन के की गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि कंपनी अब यह दावा कर रही है कि उनकी गाड़ी रायपुर पहुंचकर लौह अयस्क खाली कर चुकी है, जबकि वास्तविकता इससे बिल्कुल अलग है।
भोला झा ने स्पष्ट किया कि उनके पास टीपी (ट्रांजिट पास) और फिटनेस से जुड़े सभी दस्तावेज मौजूद हैं, और वर्तमान में उनका वाहन थाने में खड़ा है। ऐसे में वाहन के रायपुर जाकर माल खाली करने का दावा पूरी तरह संदिग्ध प्रतीत होता है।
उन्होंने इस पूरे प्रकरण की बिंदुवार और निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए कहा कि 21 अप्रैल से अब तक की सीसीटीवी फुटेज की जांच की जानी चाहिए, ताकि सच्चाई सामने आ सके। झा ने यह भी आरोप लगाया कि वंदना ग्लोबल कंपनी उन्हें गलत तरीके से चोर साबित करने का प्रयास कर रही है, जो न केवल उनकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा रहा है बल्कि उनके व्यवसाय पर भी प्रतिकूल प्रभाव डाल रहा है।
इस विवाद ने कई महत्वपूर्ण सवाल खड़े कर दिए हैं—क्या बिना पूरी जांच के किसी वाहन को ब्लैकलिस्ट करना उचित है? क्या निजी कंपनियों के पत्रों के आधार पर ही कार्रवाई होनी चाहिए? और सबसे अहम, क्या परिवहन प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जा रही है?
अब देखना होगा कि संबंधित विभाग इस मामले में कितनी गंभीरता से जांच करता है और सच्चाई को सामने लाकर न्याय सुनिश्चित करता है।
