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संत निरंकारी मिशन के आध्यात्मिक सत्संग में भजन कीर्तन भी हुआ, अंत में गुरू लंगर का भी हुआ आयोजन

कांकेर। संत निरंकारी मिशन द्वारा कांकेर में आध्यात्मिक सत्संग का आयोजन किया। नया बसस्टेंड डोम में शाम 5 बजे शुरू हुए सत्संग को संबोधित करते जमशेदपुर झारखंड से आए महात्मा विजय कुमार यादव ने कहा की 84 लाख योनियों में भगवान ने केवल मनुष्य को कर्म करने की छुट दे रखी है। ईश्वर स्वयं भी अपने विधान में व्यवधान नहीं डालते हैं। मनुष्य चाहे जैसे भी कर्म करें अच्छे या बुरे भगवान उसे रोकते नहीं हैं। ये जरूर है की भगवान मनुष्य को उसके अच्छे या बुरे कर्म के अनुसार फल जरूर देते हैं। अच्छा कर्म करने वाले को अच्छा तथा बुरे कर्म करने वाले को बुरा फल देते हैं।
सत्संग में इसका उदाहरण देते कहा की महाभारत में कौरव पांडव जुआं खेलते हैं। सभी विद्वान थे, भगवान कृष्ण के रिश्तेदार भी थे लेकिन भगवान ने उनको जुआं खेलने से रोका नहीं। पहले युधिष्ठिर जुआं के खेल में धन दौलत हारे फिर भी भगवान ने नहीं रोका। फिर राजपाठ हार गए फिर भी भगवान ने नहीं रोका। अपने भाईयों को हार गए फिर भी नहीं रोका। अपनी पत्नी द्रोपदी को भी हार गए तब भी भगवान ने नहीं रोका। दुर्योधन ने जुएं में हारी द्रोपदी को घसीटते हुए दरबार में लाने कहा फिर भी भगवान ने नहीं रोका। दुर्योधन ने द्रोपदी को अपनी जंघा में बैठाने कहा फिर भी भगवान ने नहीं रोका। भगवान चाहते तो पहले ही सब रोक देते लेकिन वे मनुष्य को कर्म करने से नहीं रोकते बल्कि वे मनुष्य जैसा कर्म करते हैं उसमें सर्पोटिव हो जाते हैं। लेकिन भगवान कृष्ण ने एक बात कही की जो जैसा कर्म करेगा उसे वैसा फल मिलेगा इसलिए सोच विचार कर कर्म करो तथा बाद में  नहीं कहना क्योंकि जैसा कर्म कर रहे हो वैसा फल भोगना पड़ेगा। दुर्योधन इसके बाद भी नहीं रूके तथा द्रोपदी का वस्त्रहरण करने कहा। द्रोपदी ने अपनी पुरी ताकत से विरोध किया लेकिन जब विवश हो गई तो अंर्तमन से भगवान को याद किया। यहां भगवान ने उदाहरण दिया की कोई अगर सच्चे मन से उनको याद करता है तो उसकी मदद जरूर करते हैं। आप सच्चे मन से भगवान को याद तो करके देखो। फिर भगवान ने अपनी लीला रची। दुर्योधन द्रोपदी की साड़ी खींचते खींचते थक गया लेकिन साड़ी खत्म ही नहीं होती थी। हमें यह विचार करना चाहिए की क्या हमने सच्चे मन से हृदय से भगवान को याद किया। प्रभु के चरणों में समर्पण किया। कभी अपने आप को प्रभु को समर्पित करके तो देखें भगवान हर पल रक्षा करेंगे। 
भगवान ने गीता में अर्जुन को ज्ञान देते कहा की हर तरह से कर्म,धर्म, पाप, पुण्य सबका त्याग कर एक मेरे चरण में आ जा मैं तेरा कल्याण कर दूंगा। उदाहरण बताते कहा की अगर कोई भिखारी आता है, कपड़े फटेहाल हैं, चेहरे में दीनता है और हाथ जोड़कर कहता है की तीन दिनों से भूखा हूं खाने को नहीं मिला तो हम अपने सामर्थ्य के अनुसार उसकी मदद कर देते हैं। लेकिन अगर वो आर्डर की तरह कहे की गाड़ी में घूम रहे हो तुम्हारे पास बहुत पैसा है मेरे को खाने के लिए दो तो क्या दोगे? उसे कोई नहीं देते। जब उसके तड़प दर्द को देखते हैं तो सामर्थ्य के अनुसार मदद करते हैं। जब किसी का दर्द देखकर हमारा दिल पसीज जाता है तो उसी दर्द उसी भाव से भगवान से प्रार्थना करेंगे तो वे मदद जरूर करेंेगे। महात्मा ने कहा की कीट, पतंग, जानवर, पेड़ पौधे के रूप में कई कई जन्म लेने के बाद एक बार मनुष्य का जन्म मिलता है। इसलिए मनुष्य जन्म लेने पर इसे सार्थक करने की दिशा में काम करना चाहिए। मनुष्य जन्म हमें ईश्वर की प्राप्ती के लिए मिला है इसलिए पुरा जीवन हमें परमात्मा के ध्यान तथा चिंतन में ही लगाना चाहिए क्योंकि इसी में मनुष्य जीवन का कल्याण होता है। जिले में निरंकारी मिशन ने तीन स्थानों कांकेर शहर के अलावा सेलेगांव तथा मचांदुर में भी सत्संग का आयोजन किया। कांकेर में आयोजित सत्संग के बाद गुरू लंगर का आयोजन किया गया। सत्संग सुनने बड़ी संख्या में श्रद्धालु महिला पुरूष पहुंचे थे। सत्संग के दौरान भजन कीर्तन का भी आयोजन किया गया।

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