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बस्तर में नई उम्मीद की किरण: बंगाली समाज की लंबित मांगें सामने – मुख्यमंत्री से अपील, 'बंग भवन' बने और नई पीढ़ी को विरासत मिले!

छत्तीसगढ़- निखिल भारत बंगाली समन्वय समिति ने बस्तर संभाग में रहने वाले बंगाली समुदाय की लंबे समय से चली आ रही मांगों को लेकर बड़ा कदम उठाया है। समिति के सदस्यों ने प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नाम एक ज्ञापन सौंपा, जिसे जगदलपुर के विधायक एवं प्रदेश अध्यक्ष भाजपा श्री किरण सिंह देव के निवास पर जाकर सौंपा गया।

समिति ने राज्य सरकार, सुरक्षा बलों और प्रशासन की इच्छाशक्ति की सराहना की, जिसके कारण बस्तर अंचल अब शांति और विकास की राह पर तेजी से अग्रसर है। ज्ञापन में कहा गया कि देश के विभाजन के बाद पूर्वी पाकिस्तान अब बांग्लादेश से राजनीतिक परिस्थितियों और धार्मिक प्रताड़ना के कारण बंगाली समाज को भारत सरकार ने विभिन्न राज्यों में विस्थापित किया था। वर्तमान में छत्तीसगढ़ में इस समुदाय के 35 लाख से अधिक लोग बसे हुए हैं, जबकि बस्तर संभाग में ही 7 लाख से अधिक बंगाली निवासरत हैं।

समिति ने बस्तर के सर्वांगीण विकास में बंगाली समाज की महत्वपूर्ण भूमिका का उल्लेख करते हुए मुख्य मांगें रखीं संभाग स्तरीय सामुदायिक भवन बंग भवन जगदलपुर संभाग मुख्यालय में उपयुक्त स्थान पर भूमि आवंटित कर सर्वसुविधायुक्त संभाग स्तरीय सामुदायिक भवन का निर्माण किया जाए। यह मांग लंबे समय से समाज द्वारा महसूस की जा रही है, ताकि सांस्कृतिक और सामुदायिक गतिविधियां सुचारु रूप से संचालित हो सकें।
बंगला भाषा शिक्षा और साहित्य अकादमी नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने के लिए राज्य स्तर पर बंगला भाषा की शिक्षा व्यवस्था शुरू की जाए। साथ ही डिजिटल संसाधनों सहित बंगला साहित्य अकादमी का गठन किया जाने हेतु प्रमुख रूप से अपनी मांग को रखा गया है । छह दशकों से बस्तर में बसे समाज के लोगों को उनके आवासीय और खेती की भूमि का स्थायी स्वामित्व देकर पट्टा जारी किया जाने की मांग रखी है।

इस अवसर पर बस्तर संभाग के प्रमुख पदाधिकारी मौजूद थे संभाग अध्यक्ष श्री जीवनानंद हालदार- उपाध्यक्ष श्री सुब्रत विश्वास महासचिव श्री श्याम घोष - सहसचिव श्री प्रदीप गुहा, संगठन सचिव श्री तनय चौधरी,
मीडिया प्रभारी  मृण्मय बारोई (बाबू) यह ज्ञापन बस्तर में शांति स्थापना के बाद विकास और सामुदायिक सद्भाव को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। बंगाली समाज की ये मांगें न केवल उनकी सांस्कृतिक पहचान को संरक्षित रखने में मदद करेंगी, बल्कि क्षेत्र के समग्र विकास में भी योगदान देंगी। उम्मीद है कि राज्य सरकार इन मांगों पर शीघ्र सकारात्मक विचार करेगी।

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